You are here

रियो ओलम्पिक के लिये चयनित होने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट दीपा कर्माकर

नई दिल्ली। भारतीय इतिहास में रियो ओलम्पिक के लिये चयनित होने वाली प्रथम भारतीय महिला जिमनास्ट ‘अर्जुन अवार्ड’ पुरस्कार प्राप्त 22 वर्षीय दीपा कर्माकर (विश्वकर्मावंशी) हैं। वह अभी हाल ही में इसके लिये चयनित हुई हैं। अभी तक भारत की कोई भी महिला जिमनास्ट इसके लिये चयनित नहीं हुई थी।
    देश की टाप जिमनास्ट दीपा कर्माकर ने आगामी अगस्त माह में होने वाले रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। इसके साथ ही त्रिपुरा की जिमनास्ट दीपा कर्माकर ऐसी पहली भारतीय जिमनास्ट बन गई हैं जिन्होंने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है।
    22 साल की दीपा रियो डि जनेरियो में अंतिम क्वालीफायर और ओलंपिक टेस्ट इवेंट में प्रभावी प्रदर्शन किया। दीपा ने कुल 52.698 अंक जुटाकर रियो ओलंपिक में अपनी जगह पक्की की। अपने पहले इवेंट प्रोडुनोवा वॉल्ट में कर्माकर को 15.066 अंक मिले जो बाकी 14 प्रतियोगियों से ज्यादा थे लेकिन अनीवन बार्स के दूसरे इवेंट में कर्माकर के खराब प्रदर्शन से उनका कुल स्कोर कम हो गया। उन्हें 11.700 अंक मिले और वह इस इवेंट में अंतिम से महज एक पायदान उपर रहीं। बीम और फ़्लोर एक्सरसाइज के अगले दो दौर में कर्माकर ने 13.366 और 12.566 अंक बटोरकर इतिहास रच दिया।
    इससे पहले भी दीपा कर्माकर पहली ऐसी भारतीय महिला जिमनास्ट बन चुकी हैं जिन्होंने वर्ष 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में कांस्य पदक जीता। इसके बाद वह ऐसी पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बनीं जिन्होंने पिछले साल नवंबर में हुए वर्ल्ड जिमनास्टिक्स चैंपियनशिप्स फाइनल्स के लिए क्वालिफाई किया।
प्रतिभा और कड़ी मेहनत की कहानी है दीपा का ओलम्पिक सफर
    ओलम्पिक जैसे बड़े टूर्नामेन्ट में खेलने का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल नैसर्गिक प्रतिभा नहीं बल्कि सच्ची लगन की जरूरत होती है। यह साबित किया है दीपा कर्माकर ने जिन्होंने समतल पैर (फ्लैट फुट) होने के बावजूद नामुमकिन को मुमकिन करने का कारनामा किया। रियो ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बनने वाली दीपा कर्माकर इम्फाल के भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) केन्द्र में भारोत्तोलन कोच दुलाल कर्माकर की बेटी हैं। दुलाल ने दीपा को छह साल की उम्र से ही जिमनास्टिक का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था। अगरतला में दीपा को कोच बिस्बेश्वर नंदी ने जिमनास्टिक का प्रशिक्षण दिया।
    दीपा कर्माकर को अपने पैरों के आकार को लेकर भी करियर की शुरूआत में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दीपा के पैरों के आकार के कारण नंदी को भी उन्हें प्रशिक्षित करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी। हालांकि जिमनास्टिक दीपा की पहली पसंद नहीं थी, लेकिन उनके पिता दुलाल ने उन्हें इस ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। दीपा ने अपने गिरने के डर पर काबू पाते हुए तेजी से सुधार किया। इस कड़ी मेहनत ने उन्हें 2007 में जलपाईगुड़ी में ‘जूनियर नेशनल्स’ का खिताब दिलवाया और यहीं से उन्होंने एक नया इतिहास रचने के क्रम में पहला कदम रखा।
    दीपा ने 2011 में त्रिपुरा का प्रतिनिधित्व कर राष्ट्रीय खेलों में 5 पदक जीत कर सुर्खियां बटोरी। दिल्ली में 2010 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में वह भारतीय जिमनास्टिक टीम का हिस्सा भी थीं, जहां उन्होंने आशीष कुमार को जिमनास्टिक में भारत का पहला पदक जीतकर इतिहास रचते देखा। आशीष को अपनी प्रेरणा मानने वाली दीपा ने 2014 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में महिला वॉल्ट वर्ग के फाइनल में कांस्य पदक जीता। एशियाई कांस्य पदक विजेता दीपा ने आर्टिस्टिक जिमनास्टिक में ओलम्पिक का टिकट हासिल किया है।
    वर्ल्ड जिमनास्टिक महासंघ-एफआईजी की वेबसाइट के मुताबिक दीपा ने टेस्ट इवेंट में कुल 52.698 अंक हासिल किए। 22 साल की दीपा ने अनइवन बार्स में खराब प्रदर्शन किया था लेकिन बीम तथा फ्लोर एक्सरसाइज में उनका प्रदर्शन इस काबिल रहा कि वह ओलम्पिक टिकट हासिल कर सकीं। नई दिल्ली में बीते वर्ष 8अगस्त को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सम्मानित की गईं दीपा की प्रतिभा को दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने भी सराहा।
    अगरतला की निवासी दीपा अक्टूबर 2015 में वर्ल्ड आर्टिस्टिक जिमनास्टिक चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। उन्होंने टूर्नामेन्ट के अंतिम चरण में 14.683 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया।
रियो ओलंपिक में पदक के लिए बेहद कड़ी मेहनत करूंगी: दीपा
    रियो ओलम्पिक के लिए पहली बार किसी भारतीय महिला जिमनास्ट के रूप में क्वालीफाई करने वाली दीपा कर्माकर ने कहा है कि वो इस महाकुंभ में पदक जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ंगी। इतिहास रचने वाली दीपा कर्माकर का अपने देश पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। उसने पत्रकारों से कहा, ‘जब से मैंने जिम्नास्टिक शुरू किया है, मैं ओलम्पिक खेलना चाहती थी। मैंने सपना देखा था कि एक दिन ओलम्पिक में अपने देश का नाम रोशन करूंगी। मैंने ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। उसने कहा, अब मैं पहले से ज्यादा मेहनत करूंगी और उम्मीद है कि रियो ओलम्पिक में पदक जीत सकूं। मैं पूरा प्रयास करूंगी कि इतिहास रचती रहूं यही मेरा लक्ष्य है।
    ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करने में लगी मेहनत के बारे में दीपा ने कहा, मैं पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप के जरिए ही ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद मैंने रियो टेस्ट इवेंट को लक्ष्य बनाया और मुझे लक्ष्य हासिल करने की खुशी है। तमाम प्रशंसाओं के बावजूद त्रिपुरा की इस जिमनास्ट ने कहा कि वह खुद को स्टार खिलाड़ी नहीं मानती। कर्माकर ने कहा, ‘मैं कोई स्टार नहीं हूं, मैं इस तरह से नहीं सोचती। मेरा काम मेहनत करते रहना है। ओलम्पिक में अच्छा प्रदर्शन करना मेरा लक्ष्य है।’ यह पूछने पर कि ओलम्पिक की तैयारी के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा मुहैया कराया गया बुनियादी ढांचा ठीक था? उसने कहा, मुझे लगता है कि यहां बुनियादी ढांचा अच्छा है। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में फोम की पिट है और साइ ने मुझसे दो दिन में नया स्प्रिंगबोर्ड लगवाने का वादा किया है। अब मेरा पूरा फोकस अभ्यास पर है।
    दीपा कर्माकर ने अपना ओलम्पिक क्वालीफिकेशन कोच बिस्बेश्वर नंदी को समर्पित किया है, जो पिछले 16 साल से उसके कोच हैं। उसने कहा, यह काफी कठिन था लेकिन मेरे पास उनके जैसा महान मेंटर है जिनकी वजह से मैं यहां हूं। अगर वो नहीं होते तो मुझे कोई नहीं पहचानता। मैं अपनी उपलब्धि उनको समर्पित करती हूं।  नंदी ने कहा कि दीपा ने अभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं किया है और परफेक्शन की ललक उसे दूर तक ले जाएगी। उन्होंने कहा, वह परफेक्शन की भूखी है और जिद्दी भी है। वह जो ठान लेती है, करके ही मानती है। उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी बाकी है और वह रियो में इससे बेहतर कर सकती है।
दीपा कर्माकर को सभी सुविधाएं देने की लोकसभा में उठी मांग
    देश में क्रिकेट को ही ज्यादा महत्व और सुविधाएं दिए जाने पर खेद जताते हुए लोकसभा में मांग की गई कि जिमनास्टिक में पहली बार भारत की ओर से ओलम्पिक खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाली महिला दीपा कर्माकर को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि वह रियो ओलम्पिक में देश का नाम और ऊंचा कर सके।
    उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा, कड़े मुकाबले के बीच दीपा कर्माकर ओलम्पिक में भारत की ओर से क्वालीफाई करने वाली न केवल पहली जिमनास्ट है बल्कि पिछले 52 साल में किसी भी खेल में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली देश की पहली महिला हैं। उन्होंने कहा कि दीपा कर्माकर अपनी मेहनत और जज्बे से यह करिश्मा कर पाई हैं और इसमें सरकारी संगठनों या खेल संगठनों की कोई खास भूमिका नहीं है। जबकि तमाम देशों की सरकारें अपने खिलाड़ियों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं जिससे वे ओलम्पिक और अन्य खेलों के लिए क्वालीफाई कर पाएं।
    अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हमारे देश में क्रिकेट को बहुत ज्यादा प्रोत्साहन दिया जाता है लेकिन बाकी खेलों के लिए कुछ खास नहीं किया जाता। खासकर जिमनास्टिक के बारे में तो कुछ भी नहीं।
    उन्होंने मांग की कि सरकार अब से दीपा कर्माकर को वे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराए जिससे वह रियो ओलम्पिक में त्रिपुरा और भारत का नाम रोशन कर सके। संसद में विभिन्न दलों के सदस्यों ने भी अनुप्रिया पटेल की बात का समर्थन किया।
52 वर्ष बाद ओलम्पिक में होगा कोई भारतीय जिमनास्ट
    दीपा कर्माकर के रियो ओलम्पिक के लिये क्वालीफाई करने के साथ ही भारत के लिए यह विशेष गौरवशाली पल हो गया है, क्योंकि 52 वर्ष बाद कोई भारतीय जिमनास्ट ओलम्पिक में उतरेगा। आजादी के बाद से भारत की ओर से 11 पुरुष जिमनास्ट ने ओलम्पिक खेलों में हिस्सा लिया था, वह भी 1952 (दो),  1956 (3) और 1964 (6 ) में। तब से कोई भी भारतीय ऐसा नहीं कर पाया है। 52 वर्ष बाद दीपा ने चयनित होकर इतिहास रचा है। 
    बहुत-बहुत शुभकामनाएं!