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विश्वकर्मा गौरव जन वैज्ञानिक स्व0 पी0एल0 मिस्त्री

शाख से टूट जाये वो पत्ते नहीं हैं हम,
आंधियों से कह दो अपनी औकात मे रहें!!
    नज्म की ये पक्तियां उन शख्सियतों को समर्पित करती हैं, जिन्होंने अपने दम पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। पी0एल0 मिस्त्री भी उनमें से ही एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने पचास वर्ष पूर्व ही विज्ञान और तकनीकी के आयामों में अपनी छवि प्रतिष्ठित कर दी थी। एक अद्भुत, अविस्मरणीय और विलक्षण वैज्ञानिक जिन्होंने विश्वकर्मा और सुथार समाज को ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व को गौरवान्वित किया। एक प्रभावशाली व्यक्तित्व जिन्होंने विज्ञान और मैकेनिज्म के सिद्धान्तों को वर्षों पहले मूर्त रूप देकर अपना लोहा मनवाया। हम बात कर रहे हैं- विश्वकर्मा गौरव स्व0 पूनमचन्द लाखाजी मिस्त्रीजी (पी0एल0 मिस्त्रीजी) की, जो राजस्थान के पाली जिले के छोटे से कस्बे तखतगढ़ में 1914 में साधारण सुथार परिवार में अपनी आंखे खोली। उनके पिता साधारण सुथारी कार्य करते थे और प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष करते हुये केवल अपने पुत्र को पांचवी तक भी शिक्षा नहीं दिला सके। लेकिन पिता ने अपने बेटे की मंशा भांप कर उसे विज्ञान और तकनीकी कार्यों के लिए सदैव प्रोत्साहित किया। 17 वर्ष की आयु में ही मिस्त्रीजी ने एक ऐसे ताले का अविष्कार किया जो गलत चाबी डालते ही हाथ पकड़ लेता था। मिस्त्रीजी के इस आविष्कार ने उन्हें पहचान दिलाई। मिस्त्रीजी ने पराधीन भारत और ब्रिटिश सरकार के समय में 17 अविष्कारों का पेटेण्ट करवा दिया था, जो अपने आप में बहुत ही आश्चर्यजनक है। जोधपुर दरबार के पूर्वमहाराजा उम्मदेसिंहजी ने उनके अविष्कारों से प्रभावित होकर एक लाख रुपए और कई एकड़ जमीन उपहार स्वरूप देना चाहा मगर मिस्त्रीजी ने मना कर उनकी मित्रता स्वीकार की। विज्ञान की विधा में जो पारंगत इन्होंने पाई वो शायद ही कोई वैज्ञानिक कर पाया होगा। गरीबी और प्रतिकूल हालातों में उन्होंने बिना किसी सहायता के 52 अविष्कार किये उनमें ये सम्मिलित हैं-
    1. छोटा भांप का इंजिन Small Steam Engine- इसे ब्रिटिश जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसमें दो छोटे पिस्टनों और भांप से यांत्रिक उर्जा मिलती थी मगर बाद मे इसे ब्रिटिश अधिकारियोंं ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया।
    2. उन्नत प्रत्यावर्तित चपाती मशीन Poori Processing Machines (पेटेण्ट नं0- 98930/1957)- इस मशीन की यह विशेषता थी कि ये आटा गूंथने के साथ ही एक साथ कई पूरी या चपाती बना देती थी। यह मैनुअल हैण्डल और बिजली दोनों से चलती थी। यह कम समय मेंं बहुत सी पूरीयां बना लेती थी।
    3. उन्नत प्रत्यावर्तित चाय काफी मशीन  Improved Tea Coffee Machines (पेटेण्ट नं0- 56988)- यह मिस्त्रीजी का सबसे चर्चित अविष्कार रहा। यह डिवाइस अपनी तरह से अलार्म सिस्टम पर काम करता और चाय कॉफी को बिना वेस्ट किये जरूरत के हिसाब से सप्लाई भी करती और चाय, दूध व काफी को मिश्रित भी करती।
    4. उन्नत प्रत्यावर्तित प्रेशर कुकर Improved Pressure Cooker- 
    5. उन्नत प्रत्यावर्तित फाउन्टेन पेन इंकपाट  Improved Ink Pot- इसे जादुई इंकपाट का अविष्कार कहा जाता था। जब पेन को इंकपाट के पास ले जाते तो पाट का ढक्कन अपने आप खुल जाता था।
    6. फोल्डिगं शिशु पालना Folding Cradle (पेटेण्ट नं0- 100415, 109655)- मूवमेन्ट पर आधारित इस पालने की यह विशेषता थी कि जब  तक बच्चा रोता तब तक पालना चलता रहता और चुप होने अथवा सो जाने के बाद रूक जाता था। इसमें मच्छरदानी का प्रयोग भी आसानी से होता था जो आज भी प्रचलन में है।
    7. समान दबाव की पानी की पाइपलाईन एवं नल व्यवस्था Device for constant pressure of water in pipeline/tap- ये एक ऐसी डिवाइस है जो सभी जगह समान प्रेशर से पानी की व्यवस्था को सुचारू रखती । इसमे नल के पीछे एक ऐसा डिवाइस होता जो अतिरिक्त दबाव को रोके रखता और कॉन्स्टेन्ट वॉटर को सप्लाई करता।
    8. मिनीऐचर आटा चक्की Miniature Flour mills (पेटेण्ट नं0- 92388)- मानव और बिजली दोनो से चलने वाली एक ऐसी पैडल चक्की जिससे आप अनाज को पीस सकते और आसानी से कहीं भी ले जा सकते थे। एक तरह से व्यायाम और कार्य दोनो मे फायदेमंद।
    9. फोल्डिंग बेड कम कुर्सी Folding Bed-Cum-Chair- एक ऐसी कुर्सी जो फोल्डिंग है और आसानी से कहीं भी ले जाई जा सकती थी और जगह भी कम रोकती थी। सोने की अवस्था में उसे खींचकर बेड बनाया जाता था।
    10. हाथ पकड़ने वाला ताला Improved Anti Theft Lock- 1960 के दशक में पेटेण्ट कराये गये इस अविष्कार की  खास बात यह थी कि गलत चाबी लगाते ही ताला हाथ पकड़ लेता था और तब तक नहीं छोड़ता जब तक कि सही चाबी से ताला न खोला जाये। इस कारण घरों की सुरक्षा में यह ताला अद्भुत था।
    11. बडा हैलोजन लैम्प   Big Halogen Lamp- 
    12. मथनी Improved churner (पेटेण्ट नं0- 92321)- मैनुअल और बिजली दोनो से चलने वाली मथनी में दो राडें घड़ी की दिशा और विपरीत दिशा में चलती थी और कम समय में मक्खन तैयार करती थी।
    13. वाशिंग मशीन Improved Double Door Washing Machine- वर्षों पहले जब कपड़े धोने की मशीनें नहीं थी उस समय मिस्त्रीजी के अरमान आज की भावी मशीन निर्माता कम्पनियोंं से कई गुना सिद्धहस्त थे। उन्होंने 1960 के दशक में ही डबल डोर वाशिंग मशीन बना दी थी। मशीन में एक ओर कपड़े धुलते तो दूसरी ओर सूखते थे।
    14. स्वचालित केरोसीन लैम्प Improved Automatic Kerosene Lamp-
    15. रोबोट Robot- यह मिस्त्रीजी का 21वीं सदी का,19वीं सदी में अविष्कार था। मिस्त्रीजी ने रोबोट का सपना उस समय ही देख लिया था जब भारत में रोबोटैक शून्य था। उस समय ऐसे रोबोट की खोज की, जो पार्क के गेट पर रहता और 25 फीट के दायरे के समस्त गतिविधियों को रिऐक्ट करता। इस अविष्कार की खास बात यह थी कि इसमें केवल यांत्रिक उर्जा का प्रयोग होता। 
    16. बिना फ्यूल के बिजली बनाने की मशीन  Machine of Machanism- इस मशीन की खासियत यह है कि इसको संचालित करने के लिये किसी फ्यूल अथवा बिजली की आवश्यकता नहीं होती। यह एक बार चालू हो जाती तो केवल ब्रेक लगाकर ही इसे रोका जा सकता है।
    17. रोड ट्रैफिक से बिजली उत्पादन Power generation from road traffic- 1960 के दशक में पेटेण्ट कराये गये इस अविष्कार की खास बात यह थी कि ये रोड ट्रैफिक पर काम करता और जितना ज्यादा ट्रैफिक होता उतनी ज्यादा बिजली बनती और स्टोरेज भी होती।
    18. प्लेटफॉर्म टिकट वेण्डिंग मशीन One anna platform wending ticket machine (पेटेण्ट नं0- 26919)- ब्रिटिश शासन काल में बनाई गई यह मशीन मैकेनिकल इंजीनियरिंग का बेहतर नूमना था। बम्बई के दो स्टेशनों पर लगाई गई ये मशीनें एक आने सिक्के को डालकर हैण्डल घुमाने पर प्लेटफॉर्म टिकट छपकर निकलता था। यह खोटे सिक्कों को खारिज कर देती थी। 1939 में पेटेण्ट कराई गई इस मशीन में जब 25 टिकट अन्दर बचते  तो अलार्म भी बजाती थी।
    19. वजन तौलने की मशीन Weight Scale machine- ये बिना बिजली का मैकेनिकल डिवाइस था।
    20. पशुशक्ति से कुएं से पानी निकालने की मशीन  Animal body weight drawn water lifting pump- बिना बिजली केवल पशुशक्ति से चलने वाले पम्प से 3000 गैलन पानी निकाला जा सकता था और पशु पर भी जोर नहीं  पड़ता था। ये अविष्कार किसानों के लिए वरदान था।
    21. उन्नत कार के टायरों में हवा नियन्त्रण तकनीक Air pressure control machanism- यह मिस्त्रीजी का अद्भुत अविष्कार है। उन्होंने इस अविष्कार के जरिये जोधपुर के पूर्वमहाराजा उम्मदेसिंहजी का दिल जीत लिया था। यह उस तकनीक पर आधारित था जिसमें कार के टायर अचानक फट जाने पर कार के क्लच और बे्रक अचानक दब जाते तथा कार बिना जर्क के रूक जाती थी।
    22. उन्नत स्वचालित साइकिल पम्प जिसमें पैडल से हवा भरी जाती थी Peddle Pump (पेटेण्ट नं0- 37081)- एक ऐसी उन्नत तकनीक जिससे पंचर साइकिल में 20 सेकेण्ड में अपने आप पैडल मारते-मारते हवा भर जाती थी।
    23. लेथ मशीन Leathe machine-
    24. रेडियो Radio-
    25. हाईड्रोलिक प्रेशर रिलीज Hydrolic pressure  release Pump-
    26. कारों के कलपुर्जे engine parts of cars-
    27. ओटोमेटिक पुल सिस्टम pully system-
    28. रेल एंटी कोलेजन सिस्टम System for prevention of train collision and accident due to derailment and sabotaging- यह मिस्त्री जी का सबसे क्रान्तिकारी अविष्कार था। यह विश्व रेलवे का सबसे बड़ा स्तम्भ होता अगर मिस्त्री जी के इस अविष्कार को सम्वभत: थोड़ा जान लिया गया होता। एक ही रेलवे ट्रैक पर जब दो गाडियां आमने सामने आ जायें तो अपने आप ब्रेक लग जाता था। इससे दुर्घटनायें नहीं होती और मिस-ट्रैफिकिंग की समस्यायें नहीं रहती। यह पूरा आविष्कार सेंंसर पर आधारित था। 
    29. फोल्डिंग झूला Folding Jhula-
    30. पानी की मोटर  Water Motors-
    31. खाना गर्म रखने के लॉक टिफिन Automatic Tiffin Lock system- 1961 में पेटेण्ट कराये गये इस टिफिन की खास विशेषता यह थी कि ये उष्मारोधी थी और इसमें ओटोमैटिक लॉक सिस्टम था।
    32. गुरूत्वाकर्षण पर कार्य करने वाला पंखा Gravitational fan- मैकेनिकल इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना जो केवल हाथ के पैडल से ही दो से तीन घंटे हवा देता था। बिना किसी बिजली के।
    33. आटोमेटिक लाईट फैन आन-आफ सिस्टम Automatic on off Electric mechanism- आदमी जब बेड पर जाता तो आटोमेटिक पंखा और लाईट चलने लगते थे। बेड से उठते ही वापस बन्द हो जाते थे। इससे बिजली की बचत होती थी।
    34. इम्प्रूव्ड फोल्डिंग कोट Improved Folding coat-
    इन सब अविष्कारों के अलावा भी मिस्त्रीजी के 18 और आविष्कार हैं जो अद्भुत हैं मगर उन्हें अभी तक पहचान नहीं मिल पायी। यह हमारे सरकार की विडम्बना कहें या अनदेखी, जिन आविष्कारों से समस्त विश्व के समृद्ध देश अपने आपको सर्वोपरि बताते हैं, और विज्ञान के क्षेत्र में इन अविष्कारों को अपना मानकर भ्रम में रहते हैं वो वास्तव में पचास वर्ष पूर्व मारवाड़ की माटी के लाल स्व0 श्री पी0एल0 मिस्त्रीजी ने विज्ञान के सिद्धान्तों को भलीभांति साकार कर दिया था। 
    बहुत बाद में जब सरकार को सुध आयी तो राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान-भारत ने मरणोपरान्त वर्ष 2002 में राज्य पुरस्कार से पूर्व राष्ट्रपति डा0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलामजी ने पुरस्कृत किया। लेकिन ये पुरस्कार मिस्त्रीजी के सम्मान हेतु यथोचित नहीं, क्योंकि मिस्त्री जी ने विज्ञान को उस समय भी दीप्तिमान रखा जब गांवों में रोशनी नहीं थी, लालटेन की रोशनी में मूर्त किये ये सिद्धान्त उस दिव्य पुरूष को तलाशती जो आधुनिक भारत को विज्ञान की श्रेणी में शायद नेतृत्व करता और आज के डिजिटल युग में वो संचार क्रान्ति का आवलम्बन होता।
    मिस्त्री जी ने न केवल वैज्ञानिकता हेतु काम किया बल्कि मानव सेवा में भी वो सारथी थे। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण में बिना फ्यूल के बिजली उत्पादन करने की मशीन का अविष्कार किया परन्तु उसे उपयोग में नहीं ला पाये। यह आने वाले पीढ़ी के लिए एक वैज्ञानिक का तोहफा था। उनके अविष्कारों में कई गूढ़ संकेत हैं और कई शोध के विषय हैं। मिस्त्री जी ने साइंस को उस सीमा तक देखा है, जहां तक मुझे नहीं लगता कि कोई अन्य वैज्ञानिक बिना संसाधनों के इतना कुछ कर सकता है। अन्तिम समय तक भी उन्होंने जीवन को विज्ञान की नजरों से देखा और स्वप्नचाह में शायद बदहाली में पड़े अपने आविष्कारों को सही पहचान मिले और राष्ट्र के उस मुकाम तक पहुंचे जहां वो सच में एक महान वैज्ञानिक थे, होने का गौरव मिले। 
    समाज के उस वैज्ञानिक को शत-शत नमन।